महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने शनिवार को कहा कि भगवद् गीता कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि ‘‘जीवन जीने का एक तरीका’’ है और शैक्षणिक संस्थानों में इसके वितरण में कुछ भी सांप्रदायिक नहीं है।
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